दार्जिलिंग में तबाही: भारी बारिश से भूस्खलन, 20 से ज़्यादा लोगों की मौत

दार्जिलिंग में तबाही

दार्जिलिंग (पश्चिम बंगाल): लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने दार्जिलिंग और आसपास के पहाड़ी इलाकों में भारी तबाही मचा दी है। बीते 24 घंटों में कई जगहों पर भूस्खलन (landslides) की घटनाएं हुईं, जिनमें अब तक कम से कम 20 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। मृतकों में बच्चे और महिलाएं भी शामिल हैं।

दार्जिलिंग में तबाही

🏚️ सबसे ज़्यादा नुकसान वाले क्षेत्र

सबसे ज़्यादा प्रभावित इलाके मिरिक, सुकियापोखरी, बिजनबाड़ी और कालीम्पोंग के पास बताए जा रहे हैं। कई घर बारिश और मिट्टी के ढेर में पूरी तरह दब गए हैं। कुछ इलाकों में सड़कें, पुल और बिजली के खंभे तक बह गए हैं जिससे संचार और यातायात दोनों ठप पड़ गए हैं।

🚨 राहत और बचाव कार्य

राज्य सरकार ने तुरंत राहत कार्य शुरू कर दिया है। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंचकर मलबा हटाने और लोगों को सुरक्षित निकालने में जुटी हैं। लगातार बारिश के कारण राहत कार्यों में दिक्कतें आ रही हैं, लेकिन प्रशासन ने साफ कहा है कि “किसी भी कीमत पर हर फंसे हुए व्यक्ति को निकाला जाएगा।”

🧒 बच्चों और परिवारों पर कहर

कई परिवारों के घर पूरी तरह मिट्टी में दब गए। एक ही परिवार के तीन बच्चों समेत पांच लोगों के मरने की खबर ने पूरे इलाके को दहला दिया है। कई जगह लोग अपने परिजनों की तलाश में मलबे को हाथों से खोदते देखे गए।

🏞️ पर्यटकों की मुश्किलें

दार्जिलिंग और मिरिक में बड़ी संख्या में पर्यटक फंसे हुए हैं। सभी होटल और होमस्टे में बिजली व पानी की आपूर्ति बंद हो चुकी है। प्रशासन ने पर्यटकों से अपील की है कि वे ऊँचे इलाकों में न जाएं और सुरक्षित स्थानों पर रहें।

⚠️ प्रशासन की चेतावनी

मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों तक और तेज बारिश का अलर्ट जारी किया है। इसके चलते दार्जिलिंग, कालीम्पोंग, जलपाईगुड़ी और सिलीगुड़ी में स्कूल-कॉलेजों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है।

🗣️ राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

इस हादसे पर विपक्षी पार्टियों ने सरकार की तैयारियों पर सवाल उठाए हैं, जबकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मृतकों के परिवारों को ₹2 लाख की सहायता राशि और घायलों को मुफ्त इलाज देने की घोषणा की है।


👉 सार:
दार्जिलिंग की पहाड़ियों में भारी बारिश ने तबाही मचा दी है — 20 से ज़्यादा मौतें, सैकड़ों घर ढहे, सड़कों और पुलों का संपर्क टूटा। प्रशासन पूरी कोशिश कर रहा है कि और कोई जनहानि न हो, लेकिन मौसम की बेरुखी अभी थमी नहीं है।

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